7 खिलाड़ी, 7 करोड़ की डील, PNB-IDBI बैंक से पैसों का इंतजाम, छोटी रकम नकद मिली, चेक कैश ही नहीं हुए

jharkhand News न्यूज़
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सेना के कब्जे वाली जिस भूखंड की रजिस्ट्री में हुए फर्जीवाड़ा को लेकर ईडी ने आईएएस छवि रंजन सहित तीन राज्यों झारखंड, बिहार, बंगाल के डेढ़ दर्जन ठिकानों पर छापेमारी की, उस फर्जीवाड़ा की पटकथा वर्ष 2020 के अंतिम महीनों में लिखी गई थी. फर्जीवाड़ा की बिसात बिछकर तैयार हुई, तो एक ही दिन में 4 एकड़ 55 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री करा ली गयी. रजिस्ट्री के लिए स्टांप ड्यूटी के रूप में कुल 83,3368 रुपये खर्च किए गए. सरकार को इस रजिस्ट्री के लिए फीस के रूप में 62,34, 460 रुपये का भुगतान किया गया. यानि1.45 करोड़ रुपये से ज्यादा पैसे सिर्फ इस जमीन की रजिस्ट्री के लिए स्टांप शुल्क और फीस के रूप में भुगतान किया गया. जगत बंधु टी-इस्टेट ने ये रकम इसलिए चुकाई, क्योंकि इस बेशकीमती जमीन की सरकारी दर से निर्धारित कीमत करीब 4 लाख 55 हजार रुपये है. लेकिन पूरे भूखंड (4.55) एकड़ का सौदा मात्र 7 करोड़ रुपये में दिखाया गया. प्रदीप बागची ने रजिस्ट्री के वक्त निबंधन पदाधिकारी के सामने स्वीकार भी किया कि उसे 7 करोड़ रुपए चेक के माध्यम से मिले हैं. लेकिन आपको यह जानकार काफी हैरानी होगी कि इस पूरे डील में प्रदीप बागची को सिर्फ 40-50 लाख रुपये ही नकद मिले.

11 चेक कभी कैश ही नहीं हुए

सूत्रों की मानें, तो रजिस्टर्ड डीड में जिस 11 चेक का जिक्र किया गया है, वो कभी कैश ही नहीं हुए. यानी सभी चेक बाउंस कर गए. सभी चेक आईडीबीआई बैंक के थे. सबसे कम राशि का चेक 25 लाख रुपये का था, जिसका चेक नंबर 461153 है. सबसे ज्यादा राशि का चेक (नंबर 00011) 1.25 करोड़ का है. जो अन्य चेक जारी किये गए थे, उसका नंबर 000003 से लेकर 000012 है. इसके अलावा टीडीएस की राशि पंजाब नेशनल बैंक की दिल्ली शाखा के खाते से जमा हुई थी. इस खाते से जो राशि जमा हुई वह करीब 7 लाख रुपये है.

जानिए लैंड स्कैम के खिलाड़ियों को

प्रदीप बागची: खुद को सेना की कब्जे वाली भूमि का दावेदार बताता है. इसने ही जगतबंधु टी इस्टेट को एमएस प्लाट-557 के रूप में दर्ज 4 एकड़ 55 डिसमिल भूमि की रजिस्ट्री कर दी. सीआई भानु प्रताप: भानु प्रताप सरकारी कर्मचारी हैं. बड़गाईं अंचल में लंबी सेवा दी है. इनके बारे में चर्चा रही है कि कीमत सही मिली, तो ये जमीन कारोबारियों के घर जा कर भी म्यूटेशन का काम आगे बढ़ा देते थे. ये दो बार एसीबी के हत्थे चढ़ चुके हैं, लेकिन फिर भी रुबाब कम नहीं हुआ. ईडी को भानु के घर से कई जमीन के कागजात (डीडी) मिले हैं.

अफसर अली उर्फ अफ्सू : अफसर अली उर्फ अफ्सू का इस पूरे स्कैम में काफी अहम रोल रहा है. रिम्स के रेडियोलॉजी विभाग में भी कार्यरत हैं. लेकिन जमीन से जुड़ा शायद ही कोई दस्तावेज और मुहर ऐसा होगा, जिसका जुगाड़ अफ्सू के पास न हो. ईडी की टीम ने अफसर के घर से कांके अंचल कार्यालय का मुहर लगा हुआ कोलकाता रजिस्ट्री ऑफिस का पेपर भी बरामद किया है.

इम्तियाज खान, तल्हा खान, फैयाज खान और मोहम्मद सद्दाम अफसर अली के सहयोगी हैं. मार्केट से काम लाने और उसका सौदा करने से लेकर पेपर डिलीवरी करने और पैसों के लेनदेन का काम ये सभी देखा करते थे. ईडी की टीम को इनके ठिकानों से भी जमीन के दस्तावेज सहित अन्य कागजात मिले हैं.

आर्मी लैंड स्कैम में सात लोग भेजे गये जेल 

राजधानी रांची के बरियातू स्थित सेना की 4.55 एकड़ जमीन घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय ( ईडी) ने गुरुवार को रांची के पूर्व डीसी छवि रंजन सहित उनसे जुड़े बड़गाईं अंचल के सीआई सहित फर्जीवाड़ा करने के आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी कर 7 लोगों को गिरफ्तार किया था.इनके ठिकानों से जमीन की हेराफेरी से संबंधित कागजात, मुहर आदि भी बरामद किए गए थे. सीआई भानु प्रताप सहित कारोबारी प्रदीप बागची, जमीन करोबारी अफसर अली, इम्तियाज खान, तल्हा खान, फैयाज खान और मोहम्मद सद्दाम को शुक्रवार को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया,जहां से सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. न्यायालय में पेशी के दौरान आरोपियों के परिजन के साथ ही साथ बचाव पक्ष के अधिवक्ता भी मौजूद थे. ईडी की ओर से विशेष लोक अभियोजक शिव प्रसाद उर्फ काका जी मौजूद थे.

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