आप है रांची के शिक्षाधिकार कार्यकर्ता तनवीर अहमद जिन्हें भारत का सर्वश्रेष्ठ सम्मान पद्मश्री मिलें….

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झारखंड में 16 सालों से लगभग 7000 ग़रीब छात्रों को शिक्षा की मशाल जलाता हुआ एक जोशीला/जुनूनी नौजवान झारखंड की शान जिसका नाम है तनवीर अहमद Tanweer Ahmad जिसने एक संगठन ही बना दिया फ़्रेंड्स ऑफ़ विकर्स सोसाईटी Friendsofweakersociety Fws जो आज झारखंड में अल्पसंख्यक ग़रीब छात्रों को शिक्षा से सभ्य नागरिक बनाने का कारवां आगे बढ़ा रहा है साथ ही इनके दोस्तों/साथियों/सीनियर्स/शिक्षाविद का भी भरपूर सहयोग तभी मिल रहा है और कारवां बढ़ रहा है।

यह सपना खुली आँखों की ताबिर है अब यह होता कैसे है मुस्लिम समाज के सभ्य नागरिकों/व्यापारियों/डॉक्टर/इंजीनियर/शिक्षकों/बुद्दिजीवियों एवं अन्य तबकों से “ज़कात” से जो साल भर की कुल कमाई हुई पूँजी में से वह चल हो या अचल संपति से अढ़ाई प्रतिशत निकली जाती है जो अमूमन रमज़ान में निकाली जाती है जिसका उपयोग समाज कल्याण में ही किया जाता है चाहे वह व्यक्तिगत हो या सामूहिक,चाहे वह सामाजिक हो या धार्मिक। इसके अलावा भी लोग आपने ख़ुशी से इस परोपकारी कार्यों के लिए अलग से भी चंदा देते है।

अब इसी ज़कात/चंदा के पैसे से ग़रीब छात्रों का नामांकन/उत्कृष्ट प्रदर्शित करने वाले छात्रों का उच्य शिक्षा के लिए नामांकन या फिर दोनों के लिए पूरे पढ़ाई/लिखाई/खाने/पीने/ड्रेसकोड/शिक्षा-दीक्षा की पूरी जिम्मेदारी ले लेती है,छः महीनें एवं साल में एक बार प्रोत्साहन हेतू वर्कशॉप/सेमिनार/संवाद कार्यक्रम के अलावा साल में एक बार झारखंड  राज्यस्तरीय शिक्षा प्रोत्साहन/गाला अवॉर्ड/सम्मान समारोह आयोजित कर सैकड़ों बच्चों को सभ्य समाज के व्यक्तित्व आईएएस/आईपीएस/डॉक्टर/इंजीनियर/प्रोफेसर/शिक्षक/मंत्री/सांसद/कुशल राजनीतिज्ञ एवं अन्य व्यक्तित्व की उपस्थिति में आयोजित करते है,जो देखने ही बनता है।

कार्यक्रम में यह लोग छात्रों के सम्मान में पुरुस्कार राशि,उत्तम सर्टिफिकेट और मोमेंटो देते है कोई उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्य या जिला टॉप करने वाले को उच्य कोटि का लैपटॉप भी देते है,ऊपर से आने जाने का भाड़ा परिजन संग सहित उत्तम खाना-पानी सभी के लिए।
जो पूरे झारखंड भर में ऐसा अल्पसंख्यक वह भी मुस्लिम समाज में नही होता दिखेगा।

ख़ैर इस पूरे परोपकारी कार्य में सहयोग लेने से तरह तरह का नकारात्मक सोच यही समाज भी बना देता है वह भी कुछ दूषित मानसिकता वाली सोच की वजह से।

अब इस पूरे घटना में कई मानसिक दुर्घटना भी होते रहती है,ज़िल्लत/बेइज़्ज़ती/परेशानी/तनावग्रस्त/तकलीफ़ देह स्थिति होते रहती है जब तक कि आपके पास बेइंतेहा सब्र न हो।
ऐसे भी समाज में अधिकत्तर बार पहले नकारात्मक सोच का माला पहनाया जाता है फ़िर ज़लील/बेइज़्ज़त करते रहने का सेहरा पहनाया जाता है,फिर जहाँ तहां जो तो मुह से पटाखा से लेकर तोप छोड़ दिया जाता है।
फ़िर भी कुछ फ़र्क नही पड़ता है तब जाकर ही कोई भी दूल्हा बनता है। जी मतलब हीरो।
तब वही समाज फ़क्र से कहता है यह तो मेरा दोस्त है/यह मेरा पड़ोसी/मेरा रिश्तेदार/मेरा अज़ीज़ और पता नही क्या क्या कहा जाएगा।

ख़ैर यह सब होता है जुनून/जोश/लगन/हौसला/सब्र/पागलपन/सीने में धधकती आग/इंकलाब/फ़ौलादी इरादा/दृढ़संकल्प/ज़ेहनी मज़बूती से।

जब एक व्यक्ति जो व्यक्तित्व बन गया जिसने आपने एक सूत्री काम “शिक्षा” से दिखा दिया कि एक आदमी चाह जाए तो पूरा माहौल बदल सकता है,जिसका उदाहरण पहाड़ तोड़कर रास्ता बनाने वाले आदरणीय दशरथ मांझी हो,चाहे पहाड़ चढ़ने वाली फ़ौलादी महिला बछेंद्री पाल हो सामाजिक जीवन सहित जीवन को उत्कृष्ट बनाने के लिए कुष्ठ रोगियों एवं समाज में हीनभावना से देखे जाने वालों लोगों के बीच ममता की मूरत मदर टेरेसा हो,आदिवासियों पर जोर ज़ुल्म के ख़िलाफ़ लड़ने वाला/अधिकार की लड़ाई/आदिवासियों के जल/जंगल/जमीन एवं आदिवासियों का अलग राज्य झारखंड बना देने वाला योद्धा आदरणीय दिशोम गुरु “शिबू सोरेन” के जैसे इसी समाज से अनगिनत हज़ारों उदाहरण है।

यही तो होते है रियल नवरत्न जिनके लिए होता है भारत सरकार का पदम सम्मान (पद्मविभूषण/पद्मभूषण/पद्मश्री) या सर्वोच्च सम्मान “भारत रत्न”

अल्पसंख्यकों के बीच गरीबों के शिक्षाधिकार कार्यकर्ता तनवीर अहमद को पद्मश्री जरूर मिले और मिलना भी चाहिए अभी हो या बाद में पर मिलेगा जरूर।

तभी तो सच होगा “सबका साथ-सबका विकास” तभी तो सच होगा “एक हाथ में क़ुरान और दूसरे हाथ में कंप्यूटर”

पर पहले झारखंड के सभ्य समाज के जिम्मेदार नागरिकों/सज़ग सामाजिक संगठनों को आगे बढ़कर ख़ुद भी पहले इज़्ज़त अफ़ज़ाई/नवाज़ने/सम्मानित करना चाहिए।इनके जैसे झारखंड में कुछ और भी नवरत्न है जिनपर सभ्य समाज को पहल करनी चाहिए।

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