मनरेगा पर हमला नहीं, संविधान पर चोट है कांग्रेस और सिविल सोसायटी ने छेड़ा साझा संघर्ष

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रांची |
झारखंड की राजधानी रांची में आज मनरेगा को लेकर हुई बैठक सिर्फ़ एक औपचारिक चर्चा नहीं थी, बल्कि यह उस लड़ाई का ऐलान थी जिसमें सवाल रोज़गार का है, सम्मान का है और संविधान से मिले अधिकारों का है। कांग्रेस नेतृत्व और देश के प्रमुख सामाजिक संगठनों ने एक सुर में कहा — मनरेगा को कमज़ोर करने की कोई भी कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों और सामाजिक आंदोलनों से जुड़े प्रतिनिधियों की इस अहम बैठक में यह साफ़ संदेश दिया गया कि मनरेगा कोई दया नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत का अधिकार है — और इसे अधिकार-आधारित स्वरूप में ही बचाया जाएगा।

ज़मीन से उठी आवाज़: मनरेगा ने मज़दूर को मज़बूत किया

बैठक में सामाजिक संगठनों ने अपने ज़मीनी अनुभव साझा करते हुए बताया कि मनरेगा ने गांवों में सिर्फ़ रोज़गार नहीं दिया, बल्कि मज़दूर को बोलने की ताक़त दी।
मनरेगा ने उस व्यवस्था को चुनौती दी जिसमें मज़दूर ठेकेदार और ज़मींदारों के रहमो-करम पर जीने को मजबूर था।

प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रो. ज्यां द्रेज, झारखंड नरेगा मंच के जेम्स हेरेंज, मनरेगा वॉच के बलराम, और कई सामाजिक संगठनों ने साफ़ कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर किया, पलायन रोका और सम्मानजनक आजीविका का रास्ता खोला।

VB GRAM G पर गहरी चिंता

बैठक में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई कि VB GRAM G जैसी व्यवस्थाएँ मनरेगा के अधिकार-आधारित ढांचे को कमजोर कर सकती हैं। सामाजिक संगठनों और कांग्रेस ने एकमत से कहा कि यदि यह कानून मनरेगा की आत्मा पर चोट करता है, तो इसे वापस लेना ही होगा।

सामाजिक कार्यकर्ता दयामणि बारला ने दो टूक कहा —

> “मनरेगा को बदला नहीं जा सकता, इसे सिर्फ़ मजबूत किया जा सकता है। VB GRAM G वापस होना चाहिए।”



‘काम मांगो अभियान’ बनेगा आंदोलन

मजदूर किसान शक्ति संगठन के सह-संस्थापक निखिल डे ने कहा कि मनरेगा ने गरीब ग्रामीणों को कर्ज़, दासता और शोषण से बाहर निकलने की ताक़त दी।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि काग़ज़ से निकलकर ज़मीन पर संघर्ष किया जाए — काम की मांग, समय पर मज़दूरी और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए।

कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने ऐलान किया कि

हर विधायक अपने क्षेत्र में ‘काम मांगो अभियान’ का मॉडल चलाएगा

राज्य स्तर पर मनरेगा टास्क फोर्स बनेगी

हर ज़िले में मनरेगा कोऑर्डिनेटर नियुक्त होंगे

सोशल ऑडिट, ब्लॉक संवाद और प्रशिक्षण कार्यक्रम तेज़ किए जाएंगे


सरकार के आंकड़े, ज़मीन की सच्चाई

ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि
2 से 5 फरवरी 2026 के बीच

4,080 पंचायतों में अभियान चला

1.74 लाख लोगों ने भाग लिया

1.03 लाख लोगों ने काम की मांग दर्ज कराई

17,914 नए जॉब कार्ड बने

अब तक 1017.65 लाख मानव-दिवस सृजित

52% जॉब कार्ड महिलाओं के नाम


ये आंकड़े बताते हैं कि मनरेगा आज भी ग्रामीण भारत की रीढ़ है।

एकजुटता का ऐलान

रचनात्मक कांग्रेस के नेशनल चेयरमैन संदीप दीक्षित ने कहा कि

> “मनरेगा ने मज़दूरी का न्यूनतम मानक तय किया। इसे कमजोर करना मज़दूरों के अधिकारों पर सीधा हमला है।”



बैठक के अंत में सामाजिक संगठनों ने साफ़ कर दिया कि वे कांग्रेस, सरकार और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर मनरेगा को बचाने की लड़ाई लगातार लड़ते रहेंगे।

यह बैठक सिर्फ़ चर्चा नहीं थी — यह चेतावनी थी।
मनरेगा से छेड़छाड़ का मतलब है, गांव के सम्मान से छेड़छाड़।

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