जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली के दयानंद प्रेक्षागृह में आज ‘डू-रे-मी -2025’ सांस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मेकॉन के मुख्य प्रबंध निदेशक श्री संजय कुमार वर्मा, विशिष्ट अतिथि श्रीमती सोनी वर्मा, विद्यालय प्रबंधन समिति की उपाध्यक्षा श्रीमती मणि मेखला दास गुप्ता विद्यालय के प्राचार्य श्री समर जीत जाना, फिरायालाल लाल पब्लिक स्कूल के प्राचार्य श्री नीरज कुमार सिन्हा के कर- कमलों द्वारा सामूहिक रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर हुआ।
इसके बाद, गणमान्य अतिथियों का सम्मान बाल पादप (सैपलिंग) देकर किया गया, जो पर्यावरण संरक्षण का संदेश था।
छात्रों ने गणमान्यों के लिए मधुर स्वागत गीत प्रस्तुत किया, जिसने सभी का मन मोह लिया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘रिश्तों की डोर’ नामक एक भावुक नृत्य-नाटिका थी। इस प्रस्तुति ने परिवार के महत्व को उजागर किया, यह संदेश दिया कि परिवार वह बगिया है जहाँ प्रेम और संस्कारों के फूल खिलते हैं।
मंचन के दौरान बच्चों ने रंग-बिरंगे परिधानों में रक्षाबंधन, दीपावली, छठ पूजा और क्रिसमस जैसे त्योहारों पर आधारित सामूहिक नृत्य देखते बनता था। नन्हें-मुन्हों की संवाद-अदायगी और कुशल अभिनय ने सभी को भावुक कर दिया। संयुक्त परिवार में रहने के लाभ और रिश्तों की मजबूती व मिठास को दर्शाने वाली इस प्रस्तुति को देखकर दर्शक-दीर्घा में बैठे कई लोगों की आँखें नम हो गईं।
इस कार्यक्रम में कक्षा एल.के.जी. से कक्षा दो तक के लगभग 200 नन्हे-मुन्ने छात्रों ने अपनी अभिनय प्रतिभा का लोहा मनवाया।
कक्षा दूसरी के नन्हें छात्र धैर्य धकड़ और अरुणि शांडिल्य की मंच संचालन देखते बनती थी। दर्शकों इनके संचालन की बोली पर झूम उठे।
प्राचार्य श्री समरजीत जाना ने बच्चों को उनके शानदार प्रदर्शन और भावुक प्रस्तुति के लिए हृदय से आभार प्रकट करते हुए कहा कि जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली सिर्फ किताबी ज्ञान देने में विश्वास नहीं रखता। हमारा उद्देश्य ऐसे नागरिक तैयार करना है जो संस्कारों से परिपूर्ण हों और जिनमें रिश्तों को संजोने की समझ हो। आज की यह प्रस्तुति इस बात का प्रमाण है कि हमारे बच्चे न केवल पढ़ाई में, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों को समझने में भी आगे हैं।
मुख्य अतिथि श्री संजय कुमार वर्मा ने छात्रों और शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आज का यह कार्यक्रम सिर्फ मनोरंजन नहीं था, बल्कि एक गहरा और महत्वपूर्ण संदेश था। इस नृत्य-नाटिका ‘रिश्तों की डोर’ ने हमें याद दिलाया कि परिवार वह बगिया है, जहाँ प्रेम और संस्कारों के फूल खिलते हैं और जिसकी नींव हमारे बड़े-बुजुर्ग होते हैं। इन नन्हे बच्चों ने अपने अभिनय और भावुक संवादों से यह साबित कर दिया कि जीवन की सारी खुशियाँ, धन और सफलताएँ तब तक अधूरी हैं, जब तक उन्हें परिवार के साथ साझा न किया जाए। उन्होंने कहा कि मैं एक कॉर्पोरेट जगत से आता हूँ, लेकिन मैं यह पूरे विश्वास से कह सकता हूँ कि जीवन की सबसे बड़ी सफलता धन-दौलत से नहीं, बल्कि मजबूत रिश्तों और अच्छे संस्कारों से मिलती है। इन बच्चों ने हमें याद दिलाया है कि हमें हमेशा अपने बड़ों का सम्मान करना चाहिए और एक संयुक्त परिवार के मूल्यों को कभी नहीं भूलना चाहिए।
इस अवसर पर उप-प्राचार्य श्री बी. एन. झा, श्री संजय कुमार, श्रीमती अनुपमा श्रीवास्तव, प्रभाग प्रभारी श्री ए के सलूजा, श्री शीलेश्वर झा ‘सुशील’, श्रीमती लिपिका कर्मकार, श्री दीपक कुमार सिन्हा, श्रीमती ममता दास, कार्यक्रम समन्वयिका श्रीमती सुष्मिता मिश्रा, डॉ. मोती प्रसाद सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
