झारखंड अलग राज्य नहीं बनने तक कमीज और पेंट नहीं पहनने का ऐतिहासिक प्रतिज्ञा करने वाले स्व. बागुन सुंबरूई के नाम से सरकारी योजना का नामकरण किया जाय. झारखंड पुनरुत्थान अभियान के संयोजक सन्नी सिंकु ने गुरुवार को सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम उपायुक्त चाईबासा को 6 सूत्री मांग पत्र सौंपा. सन्नी सिंकु ने आगे उल्लेख किया कि स्व. बागुन सुंबरूई मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के बाद 60-70 के दशक में झारखंड पार्टी का सबसे लोकप्रिय मुखर क्रांतिकारी नेता रहें हैं. जिन्होंने झारखंड अलग राज्य की लड़ाई को दिशा दी. जिनके नेतृत्व में अखिल भारतीय झारखंड पार्टी का विस्तार वृहत झारखंड के बंगाल और ओडिसा में भी की गई थी. इनके नेतृत्व में दक्षिण कोलकाता के अलीपुर और ओडिसा से झारखंड पार्टी के विधायक निर्वाचित हुए थे. स्व. सुबंरूई ने राजनीति का लंबा सफर तय किया
उन्होंने अविभाजित बिहार में 70 के दशक में सिर्फ एक आदिवासी स्टेट बस के कंडक्टर को निलंबन करने के कारण दारोगा प्रसाद राय की सरकार को गिरा दिए थे. फिर झारखंड पार्टी के निर्वाचित विधायकों के समर्थन से कर्पूरी ठाकुर का सरकार बना था. जिन्होंने 1967 में पहली बार चाईबासा से विधायक निर्वाचित होने के बाद अपनी राजनीति का लंबा सफर तय किया. इस दौरान पांच बार सांसद और चार बार विधायक चुने गए. खुला बदन और धोती पहनने के कारण ही स्व. बागुन सुंबरूई को झारखंड का गांधी कहा गया. जिस प्रकार झारखंड के स्वतंत्रता सेनानी और झारखंड आंदोलनकारी नेताओं के नाम से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बहुत से सरकारी योजनाओं का नामकरण किया है. उसी के तर्ज पर स्व. बागुन सुंबरूई के नाम से सरकारी योजना का नामकरण किया जाय. प्रतिनिधिमंडल में जगदीश चंद्र सिकु, उपेंद्र सिंकु, सिद्धेश्वर पिंगुआ शामिल थे.
