हेमंत सरकार की कोशिश झारखंडी युवाओं को मिले नौकरी, मगर कोर्ट ने बताई नीति गलत

झारखण्ड
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रांची। झारखंड की नियोजन नीति के रद्द होने से इसके दूरगामी प्रभाव की आशंका जताई जा रही है। प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यार्थियों को जहां उन्हें भविष्य की चिंता सता रही है। वहीं नियोजन नीति के रद्द होने से 50 हजार शिक्षकों की नियुक्ति का मामला भी अधार में लटक गया है। प्लस टू शिक्षक नियुक्ति के लिए 21 दिसम्बर से परीक्षा होने वाली थी। कोर्ट ने नियमावली को संविधान की मूल भावना और समानता के अधिकार का उल्लंघन करार देकर रद्द किया गया है। वही जायदातर छात्र-छात्राओं ने इसे गलत बताया तो वही कुछ छात्र छात्राओ ने इसका स्वागत किया है। छात्रों को यह चिंता सता रही है कि अगर राज्य सरकार शीघ्र नई नियमावली के साथ विज्ञापन जारी नहीं करेगी तो बहुत से अभ्यर्थियों को जेपीएससी परीक्षा से ही वंचित होना पड़ेगा। कारण बहुत से अभ्यर्थियों की जेपीएससी परीक्षा के लिए निर्धारित आयु ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए वे चाहते हैं कि सरकार शीघ्र इस दिशा में पहल करे और नई नियमावली के साथ परीक्षा के लिए विज्ञापन जारी करे। ज्ञात हो कि झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग परीक्षा ( स्नातक स्तर) संचालन (संशोधित) नियमावली 2021 को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने इस नियमावली को संविधान की मूल भावना और समानता के अधिकार का उल्लंघन करार दिया है। अदालत ने इसके तहत हुई नियुक्ति और नियुक्ति के लिए जारी सभी विज्ञापनों के निरस्त करते हुए सरकार से नए सिरे से विज्ञापन निकालने का निर्देश दिया है। इस नियमावली में सिर्फ सामान्य श्रेणी के लिए झारखंड के ही संस्थानों से 10वीं और 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने का प्रावधान किया गया था। अब देखना ये है कि झारखंड की हेमंत सरकार इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा कब खटखटाती है।

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