झारखंड की नौकरशाही में एक नया दौर शुरू होने वाला है। राज्य सरकार ने हाल ही में दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों—वंदना दादेल और मस्तराम मीणा—को मुख्य सचिव (सीएस) रैंक में प्रोन्नति देने पर अपनी सहमति जाहिर कर दी है, जबकि चार अन्य अधिकारियों को सचिव रैंक का लाभ मिलेगा। लेकिन इस प्रोन्नति की चमक दो नामों से और भी तेज हो जाती है: 1996 बैच की दिग्गज वंदना दादेल, जिन्हें सीएस रैंक का लाभ 1 जनवरी 2026 से मिलेगा, और 2010 बैच के ऊर्जावान अबु इमरान, जो सचिव रैंक में कदम रखते हुए स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में नई क्रांति लाने को तैयार हैं। ये प्रोन्नतियां न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का सम्मान हैं, बल्कि झारखंड के विकास की नब्ज को मजबूत करने का संकल्प भी। आइए, इन दो प्रेरणादायक व्यक्तित्वों की यात्रा पर नजर डालें, जो राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
वंदना दादेल: दृढ़ संकल्प की मिसाल, जो घरेलू सुरक्षा को देगी नई मजबूती
झारखंड कैडर की 1996 बैच की आईएएस अधिकारी वंदना दादेल का सफर एक प्रेरणा है—एक बी.टेक ग्रेजुएट (जन्म: 8 जनवरी 1971) से लेकर राज्य की गृह विभाग की प्रिंसिपल सेक्रेटरी तक। वंदना ने अपने 29 वर्षों के करियर में पर्यावरण, वन, जेल और आपदा प्रबंधन जैसे संवेदनशील विभागों को संभाला है। 2023 में उन्हें गृह सचिव बनाया गया, जहां उन्होंने जेल सुधार और आपदा प्रबंधन में अभूतपूर्व सुधार किए। याद कीजिए 2016 का वह साहसिक सोशल मीडिया पोस्ट, जब उन्होंने आदिवासी समुदायों की धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाकर बहस छेड़ दी थी—यह उनकी निडरता और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक था।
वर्तमान में मुख्य सचिव रैंक के तीन अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं, जिससे राज्य में सीएस रैंक के पद रिक्त हो गए हैं। वंदना की प्रोन्नति इस खालीपन को भरने वाली है। कल्पना कीजिए, एक ऐसी नेता जो मुख्यमंत्री कार्यालय की प्रिंसिपल सेक्रेटरी रह चुकी हैं और हाल ही में कैबिनेट सेक्रेटरी के रूप में राजनीतिक विवादों के बीच भी संतुलन बनाए रखीं, अब सीएस रैंक में आकर झारखंड की आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों को नई गति देंगी। यह प्रोन्नति न केवल महिलाओं के सशक्तिकरण की मिसाल है, बल्कि झारखंड जैसे खनिज-समृद्ध राज्य में स्थिरता और विकास के लिए एक मजबूत स्तंभ साबित होगी। वंदना दादेल का नेतृत्व राज्य को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से लेकर शहरी विकास तक, हर मोर्चे पर मजबूत करेगा—क्योंकि वे जानती हैं कि सच्ची सेवा साहस से ही संभव है।
अबु इमरान: युवा ऊर्जा का प्रतीक, स्वास्थ्य और शिक्षा में लाएंगे परिवर्तन की लहर
अगर वंदना दादेल अनुभव की गहराई हैं, तो अबु इमरान (जन्म: 24 मई 1983) युवा ऊर्जा और नवाचार के प्रतीक। 2010 बैच के इस आईएएस अधिकारी ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से बी.ए. किया और सीधे झारखंड की सेवा में कूद पड़े। चतरा और लातेहार के डिप्टी कमिश्नर रहते हुए उन्होंने भूमि डिजिटाइजेशन में क्रांति लाई, जिसके लिए राष्ट्रपति सम्मान तक प्राप्त किया। शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अविस्मरणीय है—उच्चतर शिक्षा निदेशक के रूप में उन्होंने झारखंड को पूर्वी भारत में स्वच्छ विद्यालय ग्रेड (SSG 2019) में प्रथम स्थान दिलाया।
वर्तमान में झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एमडी के रूप में अबु इमरान स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहे हैं। यूएसएआईडी जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ साझेदारी में उन्होंने महामारी प्रबंधन और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दी। 2010 बैच के चार अधिकारियों—अमित कुमार, राजीव रंजन सहित अबु इमरान—को सचिव रैंक मिलना राज्य के युवा प्रशासकों के लिए एक संदेश है: मेहनत और नवाचार ही ऊंचाइयों की कुंजी हैं। अबु की प्रोन्नति स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन लाएगी, जहां वे पहले से ही जोड़-तोड़ मशीनों की खरीद और ग्रामीण अस्पतालों के उन्नयन में सक्रिय हैं। झारखंड के आदिवासी और ग्रामीण इलाकों के लिए यह प्रोन्नति एक वरदान साबित होगी, क्योंकि अबु इमरान जैसा अधिकारी न केवल नीतियां बनाएंगे, बल्कि उन्हें जमीनी हकीकत से जोड़ेंगे—शिक्षा से स्वास्थ्य तक, हर कदम पर समावेशी विकास सुनिश्चित करते हुए।
मजबूत नेतृत्व से झारखंड का सुनहरा भविष्य
ये प्रोन्नतियां झारखंड प्रशासन को नई जान फूंकेंगी। वंदना दादेल की रणनीतिक दृष्टि और अबु इमरान की नवाचारी ऊर्जा मिलकर राज्य को केंद्र की नजरों में चमकाएंगे। जब तीन सीएस रैंक अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं, तो वंदना का कदम राज्य की स्थिरता के लिए जरूरी है। वहीं, सचिव रैंक में अबु जैसे युवा चेहरे आने से नीतियां अधिक समावेशी और प्रभावी होंगी। यह केवल पदोन्नति नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों नागरिकों के लिए आशा की किरण है—एक ऐसा राज्य जहां प्रशासन सेवा का माध्यम बने, न कि बाधा। वंदना और अबु की यह यात्रा हमें सिखाती है: सच्चा नेतृत्व वही है जो चुनौतियों को अवसरों में बदल दे। झारखंड अब नई उड़ान भरने को तैयार है!
