जून महीने में औसत से बहुत कम हुई बारिश, 152.4 मिमी के मुकाबले मात्र 63.3 मिमी पड़ा पानी

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इस वर्ष मॉनसून लोगों को दगा देने लगा है. कम से कम अब तक हुई बारिश से यही अनुमान लगाया जा रहा है. अमूमन 18 से 20 जून तक झारखंड में मॉनसून प्रवेश कर जाता है. इस वर्ष मौसम विभाग ने भी सामान्य मॉनसून होने का दावा किया था. लेकिन अब मौसम वैज्ञानिक का दावा भी फेल होता नजर आ रहा है. लातेहार जिला में जून माह में मात्र 63.8 मिमी बारिश हुई है, जबकि आंकड़ों के अनुसार जून माह मे लातेहार में सामान्य या औसत बारिश 152.4 मिमी होती है. जुलाई के शुरूआती 3 दिनों में मात्र 10.7 मिमी बारिश हुई है. औसतन जुलाई माह में लातेहार जिला में 344.7 मिमी बारिश दर्ज की जाती रही है.

गारू में हुई है सबसे कम बारिश, चंदवा में सबसे ज्यादा

जून माह में जिले के गारू प्रखंड में सबसे कम 26 मिमी दर्ज की गयी है. जबकि सबसे अधिक बारिश चंदवा प्रखंड में 108 मिमी रिकॉर्ड किया गया है. जिले के लातेहार में 61.6, बालूमाथ में 60.6, हेरहंज में 100.0, बारियातू में 85.2, मनिका में 30.1, सरयू में 47.0, महुआडांड़ में 54.9 मिमी बारिश दर्ज की गयी है. जिले में जून माह में 41.9 फीसदी बारिश दर्ज की गयी है. बता दें कि बरवाडीह प्रखंड में वर्षामापी यंत्र खराब होने के कारण वहां का वर्षापात रिकॉर्ड नहीं किया जा सकता है. इसी प्रकार तीन जुलाई तक जिले में मात्र 3.2 प्रतिशत बारिश ही दर्ज की गी है.

क्या कहते हैं किसान

परसही पंचायत के किसान बलराम प्रसाद ने कहा कि अब तक क्षेत्र मे संतोष जनक बारिश नहीं हुई है. अब तक खेतों में पानी जमा नहीं हुआ है. जब तक खेत में पानी जमा नहीं होगा जोत-कोड़ शुरू नहीं हो पायेगा. उन्होंने कहा कि अब तक क्षेत्र मे मात्र 10 प्रतिशत ही धान का बिहन (बिचड़ा) किया गया है. उन्होंने बताया कि पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण लोग किसी प्रकार का रिस्क नहीं लेना चाहते हैं. आज धान की खेती करना महंगा हो गया है. लोग अगर दस हजार रूपये लगा कर बिहन करे और अगर बारिश नहीं हुई तो पूरा बिहन सूख जायेगा. उन्होंने बताया कि परसही पंचायत में उनके अलावा ध्रुव पासवान व दामोदर सिंह ने ही धान का बिहन किया है. अब तक की जो स्थिति है वह संतोषजनक नहीं है. किसान मायूस हो चले हैं. आशंका व्यक्त की जा रही है कि अगर एक दो दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो इस वर्ष भी पिछले वर्ष की तरह सुखाड़ हो जायेगा.

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