ठंड से लड़ने की ताकत: माही ने नन्हे सपनों को दी गर्माहट की सौगात

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राँची दिसंबर 2025, बढ़ती सर्दी में आर्थिक रूप से कमज़ोर बच्चे जब स्कूल पहुँचते हैं, तो ठिठुरन न केवल उनके शरीर को सताती है, बल्कि उनके पढ़ाई के हौसले को भी कमजोर कर देती है। ऐसे में मौलाना आजाद ह्यूमेन इनिशिएटिव (माही) की मुहिम ने एक बार फिर इंसानियत की मिसाल कायम की है। संस्था के कोल्ड इज बोल्ड एन इनिशिएटिव बाय माही अभियान के तहत काँटाटोली की रज़ा कॉलोनी स्थित ताज स्कड पब्लिक स्कूल में एक हृदयस्पर्शी कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहाँ स्कूल के 30 जरूरतमंद लेकिन होनहार बच्चों को गर्म स्वेटर भेंट किए गए।
स्वेटर मिलते ही बच्चों के चेहरों पर खुशी की चमक और आँखों में उम्मीद की झलक साफ दिखाई दी। यह आयोजन सिर्फ कपड़ों का वितरण नहीं, बल्कि इन मासूमों के भविष्य को सुरक्षित करने की एक मजबूत कोशिश था।

स्कूल के निदेशक मोहम्मद जुबैर ने इस पहल की दिल से सराहना करते हुए कहा, इंसान की असली पहचान उसकी संवेदना से होती है। माही के सभी सदस्यों में यही संवेदना कूट-कूटकर भरी है, जो समाज की जरूरतों को समझकर आगे आते हैं। यह अभियान बेहद प्रशंसनीय है और इसका असर पूरे समाज पर सकारात्मक पड़ रहा है। किसी की कमी को पहचानना और उसे पूरा करके तरक्की का साथी बनना—यही सच्ची सेवा है। ऐसे प्रयासों से न केवल बच्चों का भविष्य संवरता है, बल्कि समाज में स्थायी बदलाव आता है। माही की टीम को सलाम!

माही के हाजी नवाब ने कार्यक्रम में बताया, हर साल मौलाना आजाद डे के अवसर पर कोल्ड इज बोल्ड एन इनिशिएटिव बाय माही अभियान चलाया जाता है, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली बच्चों को प्रोत्साहित किया जाता है। इस बार अभियान नवंबर से शुरू हुआ और बढ़ती ठंड को देखते हुए इसे दिसंबर तक बढ़ा दिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य इन बच्चों को स्कूल ड्रॉपआउट होने से बचाना है, ताकि वे मेहनत से अपने परिवार, समाज और देश का नाम रोशन कर सकें।

इस अवसर पर स्कूल के प्रमुख सदस्यों ने उत्साह से हिस्सा लिया। मुख्य रूप से उपस्थित रहे— सोहैल अख्तर, प्रिंसिपल शाहिद अनवर, शिक्षिका तानिया खुर्शीद, तलत राकिबा, अलीशा, शबनम और अनम।

माही की ये छोटी-छोटी लेकिन गहरी पहलें समाज में उम्मीद की नई किरणें जगा हैं। ठंड के इस मौसम में गर्माहट बांटकर उन्होंने साबित किया कि संवेदना और सेवा से ही एक मजबूत और समावेशी समाज का निर्माण संभव है।

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