रांची। राजनीति के क्षेत्र में हर राजनीतिक दल विपक्ष में रहते सत्तारूढ़ पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाते रही है। ऐसा बहुत कम बार देखने को मिलता है कि विपक्ष सत्ता पक्ष के नेतृत्व की तारीफ भी करें। लेकिन यह स्थिति झारखंड के राजनीति में देखने को मिल रही है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर प्रदेश भाजपा नेता तमाम आरोप लगाएं लेकिन पार्टी नेता उनकी नेतृत्व क्षमता की लगातार सराहना भी कर दे रहे हैं। इसका असर यह हुआ है कि भाजपा छोड़कर कुछ नेता हेमंत सोरेन की पार्टी झामुमो का दामन थामने से पीछे नहीं रहे हैं।
सीएम हेमंत की प्रशंसा करने वाले में पहला नाम पूर्व राज्यपाल का।
सीएम हेमंत सोरेन की प्रशंसा करने वाले में पहला नाम झारखंड के पूर्व राज्यपाल और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस का लिया जा सकता है। राज्यपाल रमेश बैस ने राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की प्रशंसा की थी। झारखंड छोड़कर जाने से पहले रमेश बैस ने सीएम हेमंत सोरेन को अच्छा नेता बताया था। रमेश बैस ने कहा था कि वह हेमंत सोरेन को एक नेता के रूप में पसंद करते हैं। उन्होंने सीएम पर चुनाव आयोग के पत्र को लेकर यह भी कहा कि पत्र का खुलासा इसलिए नहीं किया क्योंकि खनन पट्टा लीज को लेकर राज्य में अस्थिरता का माहौल था। राजनीति में इस बात की चर्चा जोरों से थी कि चुनाव आयोग के पत्र में हेमंत सोरेन के सदस्य को लेकर ऐसी कोई बात नहीं की गई थी। शायद तत्कालीन राज्यपाल भी इस बात से भली-भांति परिचित थे।
दूसरा नाम कुणाल षाड़ंगी का, कहा था -ऐसा व्यक्ति जिसके पास साझा करने के लिए हर कुछ सकारात्मक हो।
हेमंत सोरेन के नेतृत्व की मुरीद होने वाले में दूसरा नाम प्रदेश भाजपा प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी का आता है। झारखंड मुक्ति मोर्चा से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले कुणाल षाड़ंगी भले ही आज भाजपा में चले गए हो लेकिन वह हमेशा हेमंत सोरेन की तारीफ करने से पीछे नहीं हटते। बीते दिनों जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का जन्मदिन था तब सोशल मीडिया ट्विटर पर भाजपा प्रवक्ता ने एक ट्वीट कर लिखा कि राजनीति में प्रवेश करने से पहले भी वे उनके लिए सिर्फ एक राजनेता नहीं थे। विचारधाराओं, चुनावी रणनीतियों, राजनीतिक रोडमैप के संदर्भ में भले ही वे विरोध करते रहे, लेकिन हेमंत सोरेन के लिए एक राय स्थायी है। वह राय है कि “ऐसा व्यक्ति जो विनम्र, खुश और किसी से भी सीखने के लिए उत्सुक हो और जिसके पास साझा करने के लिए हर कुछ सकारात्मक हो।”
तीसरा नाम उनका जो भाजपा छोड़ झामुमो का दामन थामने से पीछे नहीं रहे।
हेमंत सोरेन के नेतृत्व पर कुछ का इतना भरोसा है कि भाजपा छोड़ झामुमो का दामन थामने से भी वे पीछे नहीं रहे हैं। ऐसा ही एक नाम हेमलाल मुर्मू का हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले वे झामुमो से अलग होकर भाजपा में शामिल हो गये थे। 2014 का लोकसभा चुनाव वह राजमहल लोकसभा सीट से लड़े लेकिन चुनाव हार गये। 2019 में फिर वह लोकसभा चुनाव लड़े फिर हार गये। पिछले दिनों ही उन्होंने झामुमो का दामन थामा है। खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस दौरान हेमलाल मुर्मू ने जहां हेमंत सोरेन के नेतृत्व क्षमता की खुलकर तारीफ की हुई, वहीं भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाया।